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  • गांधी फैज-ए-आम कालेज की प्रबंध समिति के अध्यक्ष जनाब सैयद मोइनुद्दीन के निर्देशन में अर्थशास्त्र विभाग द्वारा "भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 विश्वव्यापी महामारी का प्रभाव" विषयक एक ऑनलाइन सेमिनार, वेबीनार, का आयोजन किया गया।

    गांधी फैज-ए-आम कालेज की प्रबंध समिति के अध्यक्ष जनाब सैयद मोइनुद्दीन के निर्देशन में अर्थशास्त्र विभाग द्वारा "भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 विश्वव्यापी महामारी का प्रभाव" विषयक एक ऑनलाइन सेमिनार, वेबीनार, का आयोजन किया गया।
    संगोष्ठी के मुख्य वक्ता अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर निसार अहमद खान ने अपने वक्तव्य में कहा कि लॉकडाउन से पूर्व ही भारतीय अर्थव्यवस्था को नोटबंदी व जीएसटी जैसे दो झटके लग चुके थे। देश का जीडीपी 5 प्रतिशत से नीचे आ चुका था। बेरोजगारी पिछले 45 वर्षों के उच्चतम स्तर पर थी। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक, निजी निवेश और उपभोग व्यय काफी नीचे गिर चुका था।

    लॉकडाउन का प्रभाव अर्थव्यवस्था के तीनों वर्गों पर पड़ा हैं किन्तु तुलनात्मक रूप से सबसे कम असर कृषि क्षेत्र पर रहा । सेवा क्षेत्र, विशेष रूप से पर्यटन उद्योग एवं यातायात, शून्य स्तर पर पहुंच गया। संगठित निर्माण क्षेत्र जैसे इलेक्ट्रानिक्स, दवाईयां एंव वाहन उद्योगों से संबंधित कच्चे माल के लिए हम चीन पर निर्भर थे जो, आयात न होने के कारण, अभी ठप पड़ा हुआ है। यदि लॉकडाउन तत्काल समाप्त भी कर दिया जाता है तो इन उद्योगों को अपने पूर्व की स्थिति पर पहुंचने में छह महीने का समय लग जाएगा। असंगठित क्षेत्र का जीडीपी में योगदान 45 प्रतिशत हैं जिसमें देश की 90 प्रतिशत जनसंख्या संलग्न है। खाड़ी के देशों में निरंतर गिरते हुए तेल की कीमत हमारे निर्यात को कम करेंगे जिससे श्रमिकों की छंटनी भी करनी पड़ेगी। इसी प्रकार 90 प्रतिशत कुटीर, लघु व मंझोले उद्योग असंगठित क्षेत्र में आते हैं जिसमें केवल 10 प्रतिशत ही पंजीकृत है जिन्हें ऋण प्राप्त करने की सुविधा होती है। शेष उद्यमी अपनी पूंजी पर ही निर्भर रहते हैं ऐसे उद्योगों का निकट भविष्य में बंद हो जाना लगभग तय है। अखिल भारतीय व्यापार संगठन के अनुसार, सात करोड़ व्यापारी में 1.5 करोड़ व्यापारी अब अपनी दुकानें बंद करने को मजबूर हो जाएंगे।
     
    संगोष्ठी के अध्यक्ष प्राचार्य प्रोफेसर जमील अहमद ने कहा कि कोरोना महामारी ने न केवल इंसान, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी जोरदार झटका दिया है। पिछले 50 दिनों से चल रहे लॉकडाउन में सब कुछ ठप पड़ा है।छोटे दुकानदारों से लेकर बङे उद्योग  तक बंद हैं। ऐसे में देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से तहस-नहस हो चुकी है। किन्तु मंगलवार को माननीय प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था को संजीवनी के रूप में 20 लाख करोड़ के महापैकेज की घोषणा की है जो देश की विकास यात्रा को एक नई गति देगा।
    अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अब्दुल मोमिन ने सभी अतिथियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि घोषित राहत पैकेज की राशि सीधे किसानों एवं मजदूरों के खाते में या मनरेगा के माध्यम से हस्तांतरित कर दिया जाए तो मांग में वृद्धि होगी तथा हमारी अर्थव्यवस्था पुर्नजीवित हो उठेगी।
    इस ऑनलाइन वेबीनार का समन्वयन डॉ.मोहम्मद तारिक और संचालन डॉ.कामरान हुसैन खान ने किया।  इस दौरान डॉ. एन.यू .खान,डॉ एन.यू.सिद्दीकी, डॉ अब्दुल सलाम, डॉ. फैय़ाज अहमद, डॉ.जी.ए.कादरी, डॉ आयशा जेबी, डॉ मो. साजिद खान, डॉ. रईस अहमद, डॉ. अब्दुल वहाब, डॉ. स्वप्निल यादव, डॉ. सीमा शर्मा, डॉ. नीलम टण्डन तथा चांदनी  सहित  बड़ी संख्या में विभिन्न शहरों के प्रोफेसर और छात्र-छात्राएं ऑनलाइन उपस्थित रहें।

    प्रोफेसर जमील अहमद
    प्राचार्य,
    जीएफ कालेज शाहजहांपुर।
     

    Posted by GF College / Posted on May 16, 2020

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